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प्रगति की झलक
  (Glimpses of Progress)
बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की स्थापना 29 जून 1974 को कम्पनी एक्ट 1956 के तहत की गई थी। निगम का आॅथोराइजड कैपिटल 100.00 लाख एवं Paid Up कैपिटल 10.00 लाख है। वर्ष- 1974 से लेकर अब तक की अवधि में काफी उतार चढ़ाव के दिन निगम को देखने पड़े है। वर्ष 2003 में राज्य सरकार द्वारा बिहार के बंद किये जाने वाले 18 निगमों की सूची में बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम को भी रखा गया था। राज्य सरकार ने अप्रैल 2007 में इसे पुनर्जीवित किया और निगम के माध्यम से निर्माण हेतु संसाधन एवं राशि उपलब्ध कराई जिसके फलस्वरूप निगम द्वारा अनेक प्रतिष्ठित भवनों, पुलिस प्रांगण, आवासीय एवं गैर आवासीय भवनों का निर्माण किया गया। वर्तमान में निगम, कारा विभाग, अग्निशमन विभाग, सैनिक कल्याण विभाग, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा वाहिनी सहित वाणिज्य कर विभाग के लिए भी भवनों का निर्माण कर रहा है। वर्ष 1974-1975 में निगम का Turn over Work Expenditure रु0 6.70 लाख था एवं रु0 1.26 लाख आय हुई थी।
                  
पुलिस भवनों का संधारण एवं मरम्मति कार्य:-
                   वर्ष 2010 से बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम को बिहार सरकार द्वारा पुलिस भवन के संधारण एवं मरम्मत के कार्य की जिम्मेवारी दी गई है। पुलिस अधीक्षकों/समादेष्टाओं आदि से प्राथमिकता सूची प्राप्त कर निगम द्वारा पुलिस भवनों के संधारण एवं मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। लगभग कुल 1700 भवनों की मरम्मत/ संधारण का कार्य स्वीकृत किया गया है जिसमें लगभग 1200 भवनों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। शेष भवनों के मरम्मत का कार्य प्रगति में है।
अन्य विभागों के कार्य:-
                   निगम द्वारा कारा विभाग का कार्य किया जा रहा है। कारा विभाग के बिहार प्रशिक्षण सुधार केन्द्र हाजीपुर का निर्माण कार्य किया जा रहा है जो निकट भविष्य में पूरा होने जा रहा है। वाणिज्य कर विभाग में इनटीग्रेटेड चेक पोस्ट में पुलिस बैरक का निर्माण, सैनिक कल्याण बोर्ड, गृह रक्षा वाहिनी, अग्निशमन विभाग तथा नागरिक सुरक्षा पर्षद आदि के लिए नये भवनों के निर्माण का कार्य निगम द्वारा किया जा रहा है।
योजना का कार्यान्वयन:-
                   चयनित योजना हेतु भूकम्प जोन के अनुसार तथा स्थल मिट्टी जाँच प्रतिवेदन के अनुरूप भूकम्प रोधी प्रावधानों को सम्मिलित कर संरचना निरूपण एवं नक्शा तैयार किया जाता है। नक्शे के अनुरूप प्राक्कलन गठित कर निविदा आमंत्रित की जाती है। निविदा का निष्पादन मोनेटरिंग समिति द्वारा किया जाता है। संवेदकों द्वारा एकरारनामा किये जाने के उपरान्त निर्माण कार्य प्रारम्भ कर पूरा किया जाता है।
निर्माण कार्य की गुणवता सुनिश्चित करने के लिए:-
¦ यह सुनिश्चित किया जाता है कि उत्कृष्ट विशिष्टि का लोहा एवं सीमेन्ट हीं कार्य पर लगे।
¦ निर्माण कार्य के प्रत्येक स्तर पर वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी हो।
¦ इन्टरनेट के माध्यम से नींव, छत आदि की ढलाई के पूर्व व्यवहृत होनेवाले सामग्री, लगायी गयी लोहे की छड़, का ले-आउट, सेंटरिंग एवं शटरिंग की स्थिति आदि के फोटोग्राफ एवं प्रतिवेदन कार्य स्थल से निगम मुख्यालय में अभियन्ता से आॅन-लाईन प्राप्त कर, जाँचोपरान्त ढलाई का आदेश दिया जाता है एवं तद्ोपरान्त ढलाई की जाती है।
¦ निर्माण कार्य में व्यवहृत सामग्रियों के नमूने की जाँच निगम की जाँच प्रयोगशाला में की जाती है।
¦ अध्यक्ष-सह-प्रबन्ध निदेशक के द्वारा समय-समय पर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया जाता है।
¦ वरीय अभियन्ताओं तथा उड़नदस्ता दल के द्वारा समय-समय पर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया जाता है।
¦ कनीय अभियन्ताओं/सहायक अभियन्ताओं/कार्यपालक अभियन्ताओं के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाता है।
¦ सम्वेदकों के लिए प्रमंडलीय स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जाता है।
¦ संबंधित पुलिस उपमहानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक, नोडल पुलिस पदाधिकारियों, निगम के अभियन्ताओं एवं संवेदकों के साथ कार्यों की समीक्षा बैठक की जाती है।
¦ पुलिस महानिदेशक द्वारा प्रत्येक जिला में पुलिस भवनों के निर्माण/अनुश्रवण कार्यों के समन्वय हेतु अपर पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय)/पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) को नोडल पदाधिकारी के रूप में मनोनीत किया गया है।
¦ कार्यों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता हो, इसके लिए निगम द्वारा E-tendering से निविदा का आमंत्रण/निष्पादन किया जाता है।
¦ सभी जिला के पुलिस अधीक्षकों/संबंधित पुलिस उप-महानिरीक्षक/क्षेत्रीय महानिरीक्षक को जिला में चल रहे कार्यों का विवरण/प्रगति प्रतिवेदन भेजा जाता है, ताकि उनका पर्यवेक्षण/सहयोग/मार्गदर्शन का लाभ मिल सके।
कल्याणकारी पहल:-
1. बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-15 में अपनी अर्जित आय से 3.00 करोड़ रु0 की राशि 30-03-2015 को मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया गया।
2. पुनः बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में अपनी अर्जित आय से 1.50 करोड़ रुपये की राशि 30-04-2015 को मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया गया।
3. निगम द्वारा अपने सभी पदाधिकारियों / कर्मचारियों के लिए एक नई योजना दिनांक- 01-04-2015 से लागू किया गया है जिसके तहत किसी भी पदाधिकारी/कर्मचारी की कार्य अवधि में मृत्यृ के उपरान्त उनके आश्रित को रु0 10.00 लाख निगम द्वारा भुगतान किया जायेगा। जिसके लिये पदाधिकारियों/कर्मचारियों के वेतन से मात्र रु0 100/- प्रति माह कटौती की जा रही है। शेष राशि की प्रतिपूर्ति निगम की स्थापना मद से वहन की जायेगी।